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आइएमएफ से भेंट चाहिए तो पाकिस्तान को देनी होगी चीन से लेन-देन की जानकारी

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पिछले दो साल में पाकिस्तान द्वारा चीन से लिए गए 6.5 अरब डॉलर के वाणिज्यिक ऋण का विवरण मांगा है। आर्थिक संकट से उबरने के लिए पाकिस्तान जमानत राशि छोड़ने की मांग को लेकर आईएमएफ से बात कर रहा है।

द हिंदू  की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में पाकिस्तान अब तक के सबसे खराब वित्तीय संकटों से जूझ रहा है। उसका जीडीपी नेपाल (5.5) से 4.8 प्रतिशत कम है। 2016 के बाद से देश ने पांच बार अपनी मुद्रा का अवमूल्यन किया है, जो डॉलर के मुकाबले 26 प्रतिशत तक कमजोर है।

उसके विदेशी भंडार 800 करोड़ डॉलर के साथ दो महीने के आयात के लिए तैयार है। उसका वर्तमान खाता अभाव (सीएडी)वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के 790 करोड़ डॉलर से दोगुना होकर 1600-1800 करोड़ डॉलर तक पहुँच सकता है। 2019 के लिए सीएडी का पूर्वानुमान 5 प्रतिशत नकारात्मक है।

पाकिस्तान और आईएमएफ की समझौते पर पहुँचने के लिए बातचीत जारी है। कहा जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र की वित्त शाखा बेलआउट योजना को मंजूरी दे सकती है। हालांकि, पैकेज का आकार और सहायता बातचीत के परिणाम पर निर्भर करेंगे।

वित्त मंत्री असद उमर ने वॉशिंगटन में बैठक खत्म होने के बाद कहा, “दोनों पक्षों में कम या ज्यादा की बातें हुई। बेलआउट पैकेज की हमारी जरूरत को उन तक पहुंचा दिया गया है। उम्मीद है कि एक या दो दिन में हम एक पूर्ण समझौते तक पहुँच जाएँगे। ”

सूत्रों का कहना है कि विश्वबैंक समूह ने मई तक इस्लामाबाद की अपनी यात्रा को स्थगित कर दिया है। साथ ही चीन और पाकिस्तान के बीच हुए लेन-देन को स्पष्ट रूप से दिखाने को कहा है। इनमें बुनियादा विकास ढाँचा, रक्षा सहायता, जेएफ-17 थंडर जेट के संयुक्त निर्माण, पनडुब्बियों और परमाणु ऊर्जा के संयंत्रों की स्थापना शामिल हैं।