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अवैध अप्रवासियों के निरोध के लिए गृह मंत्रालय ने जिला मजिस्ट्रेट को दिए अधिकार

गृह मंत्रालय ने विदेशी (ट्रिब्युनल्स) आदेश, 1964 को संशोधित कर हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अवैध विदेशी अप्रवासी की पहचान, निरोध और निर्वासन के लिए विशेष अधिकरण (ट्रिब्युनल) स्थापित करने की अनुमति दे दी है, द हिंदू  ने रिपोर्ट किया।

इस संशोधन ने देश भर के सभी जिला मजिस्ट्रेटों को अधिकार दिया है कि वे विषेष ट्रिब्युनल स्थापित कर वे अवैध रूप से रह रहे व्यक्ति पर निर्णय लें कि वह भारतीय है या विदेशी। इससे पहले यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास था।

वर्तमान में अर्धन्यायिक ट्रिब्युनल केवल असम में हैं और किसी अन्य स्थान पर यदि अवैध प्रवासी पाया जाता है तो उसे पासपोर्ट अधिनियम, 1920 और विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत दंड दिया जाता है। इसके लिए तीन माह से लेकर आठ वर्ष तक के कारावास का प्रवाधान है। इसके बाद उन्हें निर्वासित किया जाता है और जब तक उनका गृह देश उन्हें नहीं स्वीकारे तब तक निरोध केंद्रों में रखा जाता है।

नए नियमों के अनुसार आम व्यक्ति भी ट्रिब्युनल तक पहुँच सकता है। इससे पहले केवल राज्य सरकार के पास ही यह अधिकार था लेकिन एनआरसी में सम्मलिति होने के लिए आम व्यक्ति को भी यह अवसर दिया जा रहा है।