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आईआईटी खड़गपुर ने 5जी के लिए बनाया यूएवी, कर सकता दूरसंचार टावर का काम

आईआईटी खड़गपुर के जीएस सान्याल स्कूल ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन के शोधकर्ताओं ने 5जी के लिए सहायता संचार अवरसंरचना के रूप में एक मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) विकसित किया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रणाली आपात स्थिति के दौरान उड़ान भरके मोबाइल दूरसंचार टॉवर के रूप में काम कर सकती है।

आईआईटी खड़गपुर ने एक बयान में कहा, “ड्रोन के बेड़े को पास स्थित मोबाइल टावरों से आपातकालीन संचार नेटवर्क बनाने के लिए एक एंड्रॉइड आधारित एप्लिकेशन के साथ फिट किया गया है।”

यह परियोजना केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित है।

अनुसंधान दल का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर देबराती सेन के हवाले से कहा गया, “इंटैलिजेंट प्रोग्रामिंग के माध्यम से हम आपातकालीन संकेत की झंडी दिखाई जाने पर अपने 5जी से जुड़े ड्रोन बेड़े को किसी विशेष स्थान पर तैनात कर सकते हैं। टेलीकम्युनिकेशन बैकबोन नेटवर्क में डाटा, बचाव सर्वर से जुड़ा होता है, जो आपदा के होने के तीन मिनट के भीतर ही हजारों मील दूर तैनात हो जाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने पहले ही चार मानव रहित हवाई वाहनों के बेड़े को तैनात करके आपदा प्रबंधन में आपातकालीन प्रतिक्रिया और सेवा की गुणवत्ता के रखरखाव की स्थितियों में ऐप नेटवर्क नेरक्वैक के साथ यूएवी नेटवर्क के प्रदर्शन का अध्ययन किया। हमने ऐप की कार्यक्षमता को जाँचने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न मोबाइल सेवा प्रदाताओं के नेटवर्क कवरेज डाटा का उपयोग किया है।”

आपदा प्रबंधन के अलावा इन स्मार्ट ड्रोन का उपयोग मोबाइल नेटवर्क से रहित क्षेत्रों में भीड़ प्रबंधन और फसल स्वास्थ्य निगरानी के लिए भी किया जा सकता है।