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“90 सेकंड में हो गया था बालाकोट हमला”, जानें मिशन पर गए पाइलटों से और बातें

26 फरवरी को भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर किए गए हमले की जानकारी को बिल्कुल गुप्त रखा गया था। यहाँ तक कि मिशन पर गए पाइलटों के परिवारजनों को भी इसकी सूचना नहीं थी, हिंदुस्तान टाइम्स  ने रिपोर्ट किया।

पुलवामा हमले में 40 सीआरपीएफ जवानों को खोने के बाद मोदी सरकार ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर खैबर पख्तून्ख्वा में हमला करने के लिए वायुसेना और मिराज 2000 लड़ाकू विमानों को हरी झंडी दिखा दी थी।

“यह सब 90 सेकंड में हुआ। हमने निशाना साधा और वापस लौट गए। किसी को नहीं, यहाँ तक कि मेरे परिवार को भी इसकी जानकारी नहीं थी।”, मिराज 2000 पाइलट ने अनाम रहने की शर्त पर बताया। एक पाइलट ने कहा, “अगले दिन जब खबर आई तो मेरी पत्नी ने पूछा, क्या मैं भी इस हमले में शामिल था। में चुपचाप सो गया।”

1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद पहली बार हुआ था कि भारत पाकिस्तानी क्षेत्र के भीतर घुसा था। पाकिस्तान के वायु रक्षण को चकमा देने के लिए अपनाई गई तकनीक का खुलासा करते हुए पाइलट ने कहा, “हमने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट बहुत सारे कॉम्बैट एयर पैट्रोल उड़ाए थे।”