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रश्मि सामंत मामले की ब्रिटेन पुलिस और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने शुरू की जाँच

ब्रिटेन की पुलिस और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने रश्मि सामंत को धमकाने और उन पर लगाए गए आरोपों के मामले की जाँच शुरू कर दी है। दरअसल, वह ऑक्सफोर्ड छात्र संघ की अध्यक्षा चुनी जाने वाली पहली भारतीय बनी थीं। इसके बाद उनपर ट्रांसफोबिया, नस्लवाद और यहूदी विरोधी विचारधारा के आरोप लगाए गए, जिसपर उन्होंने मजबूरन अपने पद को छोड़ दिया।

इन आरोपों का पहले ही पता चल चुका है कि ये गलत दावों पर आधारित हैं। ऑक्सफोर्ड में एमएससी की छात्रा सामंत पाँच महीने की पढ़ाई के दौरान ही छात्र संघ अध्यक्षा चुनी गई थीं। हिंदुओं के प्रति असहिष्णुता के कारण उनके खिलाफ षड्यंत्र रचकर अभियान शुरू किया गया।

ग्लोबल हिंदू फेडरेशन के प्रबंध निदेशक सतीश शर्मा ने अपनी शिकायत में कहा कि इसमें एक भारतीय मूल के इतिहास के शिक्षक अभिजीत सरकार शामिल थे, जिन्होंने सामंत पर आरोप लगाया था। वास्तव में सरकार ने सामंत पर अमानवीयकरण के आरोप के साथ उनको निशाना बनाया था। सरस्वती की मूर्तियों को तोड़ने पर गर्व करने वाले सरकार ने सामंत का उत्पीड़न करते हुए उनपर धार्मिक नफरत फैलाने का आरोप लगाया।

कर्नाटक के उडुपी की रहने वाली रश्मि सामंत इस प्रकरण के बाद घर वापस आ गई हैं। 24,000 पाउंड का भुगतान करने के बाद वह ऑनलाइन व्याख्यानों में हिस्सा ले रही हैं। विवाद के तुरंत बाद ही वह भारत वापस आ गई थीं। इस बीच हुए तनाव की वजह से उन्हें अस्पताल में भी भर्ती करवाना पड़ा था।

वह कहती हैं, “मैं वापस ऑक्सफोर्ड जाने में बिल्कुल भी सुरक्षित महसूस नहीं करती हूँ। अभिजीत सरकार के बयानों ने अन्य छात्रों को भी अपने अपमानजनक बयान जारी रखने के लिए उकसाया है।”