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चीनी शासन के विरोध में हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शन, विधान भवन पर किया था कब्ज़ा

एशिया में सबसे बड़ा राजनीतिक संकट उभर रहा है। हॉन्गकॉन्ग की विधान परिषद भवन पर सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने धावा बोल दिया। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कई घंटों तक भवन को अपने कब्जे में रखा।

यह विरोध प्रदर्शन उस दिन शुरू हुआ, जब हॉन्गकॉन्ग की 22वीं वर्षगाँठ को चीनी शासन की वापसी के रूप में मनाया जाना था। प्रदर्शनकारी एक अज्ञात तरल पदार्थ से हमला कर रहे हैं, जिससे 13 पुलिसवाले घायल हो चुके हैं।

प्रत्यर्पण कानून के प्रस्ताव के विरोध में तीन सप्ताह से प्रदर्शन जारी है। प्रस्तावित कानून के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हॉन्गकॉन्ग भाग जाता है तो उसे जाँच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेजा जाएगा।

प्रदर्शनकारियों की माँग प्रस्तावित कानून वापस लेने, नेता कैरी लैम का इस्तीफा और प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए मुकदमों को हटाने की है। विरोध प्रदर्शन में करीब 5,00,000 लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों को विधान भवन से पीछे धकेलने के लिए पुलिस ने डंडों और मिर्ची स्प्रे का इस्तेमाल कर दिया।

इस पर प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया। भवन तीन घंटे तक उनके कब्ज़े में रहा। हालांकि, पहले की रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि प्रदर्शनकारियों के भवन में घुसने से पहले उसे खाली करवा लिया गया था।

हॉन्गकॉन्ग की नेता कैरी लैम ने अपने भाषण में कहा, “मेरी सरकार की मंशा अच्छी है। मैं लोगों की इच्छाओं, भावनाओं और राय के साथ निकटता से काम करूंगी।” इससे पहले विवादास्पद कानून को लागू करने के लिए वे माफी माँग चुकी हैं।

मामले से अब तक दूर रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जल्द बड़ा कदम उठाने की उम्मीद है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस अशांति को दुखद बताया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “चीन के आंतरिक मामलों में विदेशी देश को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।