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हरियाणा सरकार ने दो बिजली संयंत्रों के लिए रद्द किए चीनी कंपनियों के अनुबंध

लद्दाख में भारत और चीन के बीच हाल के घटनाक्रमों के बाद हरियाणा सरकार ने चीनी कंपनियों को जारी किए गए अनुबंधों को रद्द कर दिया। यह निर्णय दो अलग-अलग चीनी कंपनियों को दिए गए बिजली संयंत्रों के अनुबंधों के बारे में किया गया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, विचाराधीन बिजली संयंत्र यमुनानगर और हिसार में हैं। दोनों संयंत्रों की बोली प्रक्रिया चीनी कंपनियों ने जीती और ठेके हासिल किए। यह बोली हरियाणा बिजली उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीसीएल) द्वारा आमंत्रित की गई थी।

पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 7 दिसंबर 2015 को प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना के लिए बिजली संयंत्रों को नए पर्यावरण मानदंड जारी किए थे। इसके बाद प्रदेश सरकार ने हिसार और यमुनानगर स्थित बिजली संयंत्रों में फ्ल्यू गैस डिसल्फराइजेशन सिस्टम स्थापित करने का निर्णय लिया। इसके लिए राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया।

एचपीजीसीएल ने अंतर-राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर निविदाएँ मांगी थी। दीन बंधु छोटू राम थर्मल पावर स्टेशन यमुनानगर के लिए पाँच कंपनियों ने बाली लगाई। इनमें तीन चीन की हैं, जबकि दो भारत की। भारतीय बोलीदाताओं में एक कंपनी मैसर्स ईपीआईएल चीनी फर्म से जुड़ी है, जबकि मैसर्स भेल एक अन्य विदेशी फर्म से जुड़ी है।

हिसार के खेदड़ में स्थित बिजली संयंत्रों के लिए निविदा में तीन फर्मों ने भाग लिया, जिसमें दो चीनी फर्म और तीसरी मैसर्स भेल (विदेशी सहयोग के साथ) है। इसके बाद हरियाणा सरकार ने इन निविदाओं को रद्द करने और एनटीपीसी की तर्ज पर घरेलू बोली के आधार पर नए सिरे से निविदाएँ जारी करने के आदेश दिए। साथ ही कहा कि नई बोली में केवल भारतीय कंपनियाँ शामिल होंगी।