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हरीश साल्वे ने मुंबई पुलिस पर उठाए प्रश्न, अर्णब मामले में न्यायालय का निर्णय सुरक्षित

सर्वोच्च न्यायालय में रिपब्लिक टीवी के मुख्य संपादक अर्णब गोस्वामी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने मुंबई पुलिस की निष्पक्षता पर संदेह जताया। उन्होंने न्यायालय से प्रार्थना की कि अर्णब के खिलाफ एफआईआर की जाँच सीबीआई को हस्तांतरित कर दी जाए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, रजा एजुकेशनल वेलफेयर सोसायटी के सचिव इरफान अबुबकर शेख की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने अर्णब के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिसको रद्द करने की मांग करते हुए हरीश साल्वे ने कहा, “आपराधिक जाँच का मकसद पत्रकारिता के लिए उनके मुवक्किल को परेशान करना था।”

उन्होंने कहा, “मीडिया हाउस के सीईओ से पुलिस ने छह घरों में पूछताछ की। उन्होंने उनसे पूछा, “एक कंपनी के सीईओ को एक समाचार प्रसारण से क्या मिला, जो कथित रूप से सांप्रदायिक समस्याओं की वजह था?”

साल्वे ने दावा किया कि पुलिस कंपनी के वित्तीय विवरणों को भी जानना चाहती है। साल्वे के हवाले से कहा गया, “यह देखते हुए कि मैंने अपने कार्यक्रम में स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, मुझे कोई समस्या नहीं है अगर पालघर की घटना की टिप्पणी को सीबीआई को हस्तांतरित कर दी जाए।”

न्यायालय ने अंततः इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रखा और अर्णब को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की, जब तक कि मामले का निर्णय नहीं सुनाया जाता है।