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हार्दिक पटेल के चुनाव लड़ने पर काले बादल, न्यायालय ने खारिज की सुनवाई याचिका

मंगलवार (2 अप्रैल) को सर्वोच्च न्यायालय ने हार्दिक पटेल की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए इंकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने 2015 में हुए दंगों के लिए उनपर लगे आरोपों को निलंबित करने की मांग की थी, टाइम्स ऑफ इंडिया  ने रिपोर्ट किया।

न्यायधीश अरुण मिश्रा की बेंच के पास तत्काल सुनवाई का यह मुकदमा था। इस पीठ में न्यायधीश एमएम शान्तनागोदार और नवीन सिन्हा भी शामिल हैं, और उन्होंने इस मामले में कहा है कि इसकी तत्काल सुनवाई की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इस मामले में पिछले साल अगस्त में उच्च न्यायालय ने भी इसी मामले में हार्दिक की याचिका को ख़ारिज कर दिया था।

मेहसाणा जिले के सेशन कोर्ट ने 2015 में विसनगर में पाटीदार आंदोलन के दौरान हुए दंगे के मामले में हार्दिक पटेल को दोषी करार दिया था। भाजपा विधायक ऋषिकेश पटेल के कार्यालय में तोड़फोड़ के मामले में हार्दिक पटेल और उनके साथियों को दो साल की सजा सुनाई गई थी।

जन प्रतिनिधि अधिनयम 1951 के तहत दो या दो साल से अधिक की सज़ा पाने वाले नेताओं को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होती है।पाटीदार आरक्षण आंदोलन से उभरे 25 साल के हार्दिक पटेल ने 12 मार्च को कांग्रेस में शामिल होने के बाद जामनगर से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी।

जामनगर लोकसभा सीट नामांकन के लिए 4 अप्रैल आखिरी तारीख है, और सर्वोच्च न्यायालय ने भी हार्दिक की सुनवाई के लिए 4 अप्रैल की तारीख दी है। अगर वह निर्दोषी साबित नहीं होते हैं तो हार्दिक पटेल इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएँगे।