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बीपीसीएल के निजीकरण की राह सरल करने हेतु एफडीआई नीति में बदलाव पर विचार

सरकारी स्वामित्व वाली भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के निजीकरण की राह सरल करने के लिए केंद्र सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति में बदलाव पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि तेल शोधन की इस बड़ी कंपनी में हिस्सेदारी के लिए विदेशी निवेशकों को बहुमत हासिल करने की अनुमति मिल सके।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कहा गया कि एफडीआई में बदलाव का प्रस्ताव फिलहाल निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम), उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईआईटी) और आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) के बीच विचाराधीन है।

वर्तमान में देश के स्वामित्व वाले उद्यमों द्वारा पेट्रोलियम रिफाइनिंग में स्वचालित मार्ग के माध्यम से केवल 49 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। इस तरह वर्तमान मानदंडों के अनुसार, एक विदेशी कंपनी बीपीसीएल में 49 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं खरीद पाएगी। इस परिदृश्य में कहा गया कि दीपम ने नीति में संशोधन करने और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने का सुझाव दिया है।

सरकार को बीपीसीएल में अपनी संपूर्ण 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए तीन अभिरुचि पत्र (ईओआई) प्राप्त हुए हैं। वहीं, इच्छुक कंपनियों में से एक अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता है। अन्य दो कंपनियों में अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट सहित वैश्विक निधि कहा जाता है।