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जघन्य अपराध करने पर नाबालिग पर भी बालिग की तरह चले मामला, केंद्र का मंथन जारी

गृह मंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय मंत्रियों की बैठक में चर्चा की गई कि जघन्य अपराध में शामिल होने वाले नाबालिग पर भी बालिग की तरह मामला चलाया जाए। इसके लिए केंद्र सरकार किशोर न्याय अधिनियम में बदलाव की योजना बना रही है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद, महिला विकास मंत्री स्मृति ईरानी, विदेश मंत्री एस रविशंकर, हरसिमरत सिंह बादल और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन शामिल थे। अधिनियम में जघन्य अपराध की श्रेणी को फिर से वर्गीकृत करने पर चर्चा हुई।

केंद्र सरकार के मंत्रियों की यह बैठक सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद की है। जनवरी 2020 के अपने निर्देश में न्यायालय ने कहा था कि जल्द किशोर न्याय अधिनियम 2015 की खामियों को दूर किया जाए।

न्यायालय ने कहा था कि जो वारदातें दुष्कर्म, हत्या या आतंकवाद की श्रेणी में नहीं आती हैं लेकिन उनमें सज़ा सात साल या उससे अधिक है तो उनकी श्रेणी तय की जाए। सुझाव दिया गया था कि इन्हें भी गंभीर वारदातों की श्रेणी में रखा जाए। बैठक में इस विषय पर भी चर्चा हुई कि जघन्य अपराधों में नाबालिगों की संख्या बढ़ लगातार रही है।