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मुख्यमंत्री और मंत्रियों का आयकर जमा नहीं करेगी सरकार, खत्म होगा कानून- योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजकोष से मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों का आयकर जमा करने के 1981 में बने विवादास्पद प्रावधान को रद्द करने की तरफ तेजी से कदम बढ़ाया है। उन्होंने शुक्रवार को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को पुराना कानून खत्म करने के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव कैबिनेट के बाद अगले विधानसभा सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखा जाएगा। कानून के मुताबिक, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कम वेतनमान की वजह से अपना आयकर भरने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। यह कानून 1981 में वीपी सिंह के मुख्यमंत्री काल के दौरान बनाया गया था। इसमें वेतन, भत्ते और विविध अधिनियम शामिल किए गए थे।

इस कानून ने अब तक 19 मुख्यमंत्रियों और लगभग 1000 मंत्रियों को लाभ पहुँचाया है। इनमें योगी आदित्यनाथ, मुलायम सिंह यादव, मायावती, कल्याण सिंह, अखिलेश यादव, राम प्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह, श्रीपति मिश्र, वीर बहादुर सिंह और नारायण दत्त तिवारी के नाम शामिल हैं।

योगी सरकार में ही इस बार अकेले 86 लाख रुपये कर चुकाए गए हैं। कानून लागू करवाते वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह ने विधानसभा में तर्क दिया था कि राज्य सरकार को आयकर का बोझ उठाना चाहिए। अधिकतर मंत्री गरीब पृष्ठभूमि से हैं और उनकी आय कम है। हालाँकि, वक्त बीतने के साथ नेताओं की घोषित संपत्ति करोड़ों में पहुँच गई है।

मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया, “मुख्यमंत्री ने सभी पुरातन कानूनों को खत्म करने का निर्देश दिया है। एक विस्तृत चर्चा के बाद उन्होंने मुझे जल्दी से कैबिनेट के प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने के लिए कहा है। हम कांग्रेस सरकार के पापों को सहन नहीं करेंगे।”