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तुर्की का पाकिस्तान को समर्थन भारत से व्यापार पर भारी, आयात में हो सकती है कटौती

मलेशिया से आने वाले पामोलिन, कच्चे और परिष्कृत ताड़ के तेल पर प्रतिबंध लगाने के बाद। तुर्की द्वारा भारत की आंतरिक समस्याओं में हस्तक्षेप करने के कारण भारत ने अपनी आर्थिक ताकत का उपयोग करके उसपर संभावित व्यापार प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बीते कुछ समय से तुर्की पाकिस्तान के साथ खुले तौर पर खड़ा दिखाई दिया है और उसने कश्मीर पर और धारा 370 को निरस्त करने को लेकर कई बयान दिए हैं।

अतीत में तुर्की ने भी पाकिस्तान के परमाणु परीक्षणों का समर्थन किया था और इसे भारत के परमाणु कार्यक्रम की प्रतिक्रिया कहा था।

आपको बता दें कि 24 सितंबर 2019 को तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाया था और कहा था, “प्रस्तावों को अपनाने के बावजूद कश्मीर अभी भी घिरा हुआ है और 80 लाख लोग कश्मीर में फंसे हुए हैं।” उन्होंने कश्मीर संघर्ष पर ध्यान देने में विफल रहने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भी आलोचना की थी।

हालांकि सरकार ने यह तय नहीं किया है कि इस मामले में तुर्की के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। ऐसा कहा जा रहा है कि मलेशिया के खिलाफ तकनीकी मानकों को लागू करने और माइक्रोप्रोसेसरों के आयात पर गुणवत्ता नियंत्रण के आदेश के साथ-साथ दूरसंचार उपकरणों पर प्रतिबंध लगाने पर सरकार काम कर रही है और जो संभवत मलेशिया के लिए बहुत महंगा निर्णय साबित होगा।

रिपोर्टों के अनुसार, सरकार तुर्की से तेल और इस्पात आयात में कटौती करने की योजना बना सकती है। 2019-20 के दौरान तुर्की के साथ भारत का व्यापार 7.8 अरब डॉलर से कम था, जिसमें से 2.4 अरब डॉलर से कम के आयात में से तेल प्रमुख घटक था।

1950 के दशक में, तुर्की और पाकिस्तान ने शाश्वत मित्रता की संधि पर हस्ताक्षर किए थे। यह साझेदारी काफी हद तक इस्लाम और इस तथ्य के आधार पर स्थापित की गई थी कि दोनों देश सुन्नी बहुल्य क्षेत्र हैं।