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गेहूँ का आयात शुल्क केंद्र सरकार ने 10 प्रतिशत बढ़ाया, किसानों को पहुँचाया फायदा

केंद्र सरकार ने देश में गेहूँ की खेती करने वाले किसानों को फायदा पहुँचाने के लिए आयात शुल्क पर 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। अब विदेशों से आयात शुल्क 30 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गत वर्ष अत्यधिक फसल उत्पादन और रिकॉर्ड पैदावार के पूर्वानुमान के कारण 11 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय गेहूँ की कीमतें गिर गई हैं।

दुनिया में भारत अनाज का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। उसका यह कदम कम कीमतों के कृषि संकट को नियंत्रित करता है। कीमतों में वैश्विक गिरावट के बीच भी यह कदम आयातित गेहूँ को आटा मिलों के लिए अनुपयुक्त बना देगा।

अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कीमतें समर्थन मूल्यों से ऊपर रहें। भारत ने 2019 के लिए स्थानीय किसानों से नए सीजन के गेहूँ की कीमत 6 प्रतिशत बढ़ाकर 1,840 रुपये प्रति टन कर दी है। सरकार आमतौर पर लगभग एक चौथाई गेहूँ किसानों से राज्य-निर्धारित कीमतों पर भंडारण के लिए खरीद लेती है, ताकि वह एक प्रमुख खाद्य कल्याण कार्यक्रम चला सके।

भारत का गेहूँ उत्पादन 2019 में 99.12 मिलियन टन तक पहुँचने की उम्मीद है। उच्च उत्पादन की वजह से इस साल गेहूँ का आयात 1.65 मिलियन टन रहा है, जबकि पिछले साल यह 5.7 मिलियन टन था। भारत में गेहूँ आयात मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, रूस और यूक्रेन से होता था।