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“घग्गर-हकरा हड़प्पा के शिखर समय में बारहमासी नदी थी”- नेचर, क्या वही सरस्वती है?

प्रतिष्ठित ब्रिटिश पत्रिका नेचर के नए वैज्ञानिक अध्ययन में बड़ा दावा किया गया है। इसमें कहा गया, “वर्तमान में भारत और पाकिस्तान में बहने वाली घग्गर-हकरा नदी, वास्तव में एक बारहमासी नदी थी, जो हड़प्पा सभ्यता की चरम सीमा कहे जाने वाले समय में बहा करती थी।”

यह अध्ययन उस सिद्धांत का मजबूती से समर्थन करता है, जिसके अनुसार घग्गर-हकरा नदी ही प्राचीन काल की सरस्वती नदी है। इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी है। ऋग्वेद के अनुसार “सरस्वती नदी एक बारहमासी नदी है।”

वहीं, इसके विपरीत दूसरे सिद्धांत में घग्गर-हकरा नदी को मौसमी नदी कहा गया है। इस वजह से हड़प्पा सभ्यता के लोग बारिश के मौसम पर निर्भर रहते थे।

शोधकर्ताओं ने नदी के विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों में परिवर्तन को समझने के लिए नदी के 300 किलोमीटर लंबे हिस्से में पुनर्निर्मित हुए तलछटों को देखा। इन प्रयासों के चलते शोधकर्ता 78,000 से 18,000 ईसा पूर्व और 7000-2500 ईसा पूर्व के दो प्रमुख कालखंडों को स्थापित कर पाने में सफल हुए, जब नदी बारहमासी होकर बहा करती थी।

ऐसा माना गया है कि बाद के समय में सतलुज की सहायक नदियों से यह नदी पुनः बारहमासी बनी होगी। अपने नतीजे में शोधकर्ताओं ने नदी के पुनः बारहमासी बनाने के चरण को हड़प्पा सभ्यता के नीचे गिरने की शुरुआत के समय से जोड़ा। इसके बाद ही लोगों ने घग्गर-सरस्वती घाटी को छोड़ दूसरी उपजाऊ जमीनों की तलाश करनी शुरू की होगी।