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“चीन से बातचीत असफल हुई, तभी सैन्य कार्रवाई पर करेंगे विचार”- जनरल बिपिन रावत

सीमा विवाद सुलझाने के लिए हो रही लगातार बैठकें चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के रुख की वजह से बेनतीजा रह रही हैं। ऐसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने पड़ोसी देश को चेतावनी देते हुए कहा, “लद्दाख में चीन की सेना के रुख को देखते हुए सैन्य विकल्प खुले हुए हैं।”

न्यूज़-18 की रिपोर्ट के अनुसार, जनरल रावत ने कहा, “सैन्य विकल्प का उपयोग करने पर विचार केवल तभी किया जाएगा, जब दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर चल रही बातचीत असफल हो जाती है। एलएसी के साथ हुए बदलाव अलग-अलग धारणाओं के कारण होते हैं। सीमा पर रक्षा सेवाओं पर निगरानी रखने और घुसपैठ रोकने का अभियान चलाया जाता है। साथ ही किसी भी मामले का शाँतिपूर्ण हल निकालने और घुसपैठ पर रोक लगाने के इरादे से सरकार के संपूर्ण दृष्टिकोण को अपनाया जाता है।”

उन्होंने कहा, “रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जिम्मेदार लोग उन सभी विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं, जिससे एलएसी पर यथास्थिति एक बार फिर बहाल हो सके।”

चीन की सेना के साथ डोकलाम में वर्ष 2017 में 73 दिन तक चले सैन्य गतिरोध के दौरान सेना प्रमुख रहे रावत ने उन सभी बातों का खंडन किया, जिसमें कहा जा रहा कि देश की प्रमुख खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी है।

उधर, भारत ने पूर्वी लद्दाख में फिंगर क्षेत्र से समान दूरी पर पीछे हटने के चीनी सुझाव को खारिज कर दिया है। कूटनीतिक स्तर की बातचीत के बाद दोनों पक्ष सीमा मुद्दे को सुलझाने के लिए सैन्य-स्तर की और वार्ताएँ करने की योजना बना रहे हैं।