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एनसीपी-कांग्रेस के सेक्युलर मूल्यों हेतु? प्रस्तावित गठबंधन नाम से शिव हटाकर विकास
आईएएनएस - 22nd November 2019

महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कुछ सहयोगी दलों के आरक्षण को संबोधित करने के लिए शिवसेना के साथ नए आगामी गठबंधन का प्रस्तावित नाम ‘महा विकास अघाड़ी’ होने की संभावना है। उधर, खबरें आ रही हैं कि नई सरकार में शामिल ये तीनों दल 50-50 के सूत्र का पालन करेंगे। शिवसेना और एनसीपी के बीच ढाई-ढाई वर्ष के लिए मुख्यमंत्री पद संभालने का समझौता हो सकता है। वहीं, कांग्रेस को उपमुख्यमंत्री पद मिल सकता है।

सूत्रों का कहना है कि अब तक शिवसेना संभावित गठबंधन को ‘महा शिव अघाड़ी’ करार दे रही थी। हालाँकि, ‘महा अघाड़ी’ के कुछ छोटे सहयोगियों के सुझावों के बाद, ‘शिव’ को ‘विकास’ से बदलकर इसे और अधिक तटस्थ बना दिया गया।

एक कांग्रेसी नेता ने बताया, “हमें उम्मीद है कि इसमें सार्वभौमिक अपील होगी। इससे शिवसेना को भी आपत्ति नहीं हो सकती। यह आगामी शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस सरकार के विकास के मुख्य एजेंडे को पूरा करती है।

उन्होंने बताया कि कुछ छोटे दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी कि ‘शिव अघाड़ी’ में केवल शिवसेना का नाम ही क्यों दिखाई दे। खासकर, तब जब वह भाजपा के साथ पूर्व ‘महायुति’ गठबंधन का हिस्सा थे और अन्य दल भगवा समूह का पिछले 25 से अधिक वर्षों से समर्थन कर रहे थे।

इस तटस्थ नाम के साथ महा अघाड़ी गठबंधन में कांग्रेस-एनसीपी के सहयोगी जैसे सीपीआई, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन, किसान और श्रमिक पार्टी व अन्य, जो कई दशकों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रखते हैं और विभिन्न स्तरों पर शिवसेना के साथ लड़े हैं, वो खुद को कमतर महसूस करेंगे।

परिवर्तन की हवाओं को महसूस करते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा था, “भारत और उसके संविधान की नींव धर्मनिरपेक्ष शब्द पर आधारित है। आप किसानों या बेरोजगारों से यह नहीं पूछते कि उनकी जाति या धर्म क्या है। देश के सभी हिस्सेदार धर्मनिर्पेक्ष हैं।”