समाचार
हैदर से लश्कर तक- कैसे आतंक के जाल में फँसा एक कश्मीरी बाल कलाकार

रविवार को श्रीनगर के मजगुंड में चली 18 घंटे की मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए हैं। चौंकाने वाली बात है कि मारे गए तीन आतंकियों में से 2 नाबालिग थे। इनकी पहचान मुदसिर पररे, जिसकी उम्र केवल 15 वर्ष थी, तथा साकिब बिलाल की गई है। वहीं तीसरे आतंकी की पहचान पाकिस्तान के अली भाई के रूप में की गई है, न्यूज़ 18 की रिपोर्ट में बताया गया।

तीन महीने पहले दोनों ही लड़के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने घर छोड़ कर निकल गए थे। दोनों हजिन की ईदगाह के समीप नियमित रूप से फुटबॉल खेला करते थे। उनके एक साथी खिलाड़ी उमर ने 31 अगस्त को बताया था कि मुदसिर फुटबॉल खेल रहा था, तभी साकिब आया और फिर दोनों चले गए, तथा उसके बाद से कभी नहीं लौटे। उनके परिवारों ने उन्हें अलगाववाद के बड़े केंद्र दक्षिण कश्मीर में भी तलाशा लेकिन नाकाम रहे।

हजिन नगर के लोगों ने जब इन लड़कों की तस्वीर इंटरनेट पर एके-47 के साथ देखी तो दो फुटबॉल खिलाड़ियों के आतंकी बन जाने पर वे आश्चर्यचकित रह गए। बता दें कि हजिन, भारत समर्थक समूह इखवान का केंद्र रहा है ।

साकिब एक होनहार छात्र था, जिसने “हैदर” फिल्म में छोटा किरदार भी निभाया था। गौरतलब है कि हैदर फिल्म कश्मीरी हिंसा पर केंद्रित थी। उसके पिता, बिलाल अहमद शेख़ ने बताया कि साकिब को अभियांत्रिकी में रूचि थी तथा उसने कभी भी अलगाववादी होने की बात नहीं कही थी। उनका घर मारे गए इखवान कमांडर कुका पररे के घर के सामने था। कुका आतंकियों को हराने के लिए जाना जाता है।

मुदसिर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह अपने परिवार की सहायता करने के लिए मज़दूरी करता था, उसके पिता, राशिद अहमद पररे ने उसे एक मेहनती लड़का बताते हुए कहा कि वह कमाए हुए सारे पैसे उसकी माँ को लाकर दे देता था।

लेकिन उसके लक्षण पहले ही दिख गए थे, जब 2016 में उसे पत्थरबाज़ी के केस में पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उसके पड़ोसी जो कि उसे फुटबॉल खेलता देख गर्व करते थे और उम्मीद करते थे कि वह एक अच्छा खिलाड़ी बनेगा, उसे हिरासत में देख आश्चर्यचकित रह गए। बाद में पुलिस द्वारा परामर्श दिए जाने के बाद उसे उसके पिता के साथ जाने दिया गया। राशिद ने कहा कि उनके एक 19 वर्षीय रिश्तेदार आबिद हामिद मीर की 2017 में मौत के बात उनके बेटे ने अलगाववाद का हाथ थाम लिया।
उनके अनुसार आबिद से काफ़ी लगाव रखने वाला मुदसिर, जब अगले दिन उस स्थान पर गया जहाँ आबिद मारा गया था तभी उसे आतंकी बनने का विचार आया होगा। राशिद के अनुसार इस तरह से मरने की इच्छा उनके बेटे की ही थी।

अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, ” दोनों ही अंतर्राष्ट्रीय तथा गैर अंतर्राष्ट्रीय सशस्त्र युद्धों में बच्चों को सशस्त्र दलों में शामिल करना युद्ध अपराध है।” फिर भी अफ्रीका से लेकर मध्य पूर्व तथा कश्मीर तक इस्लामी संगठन नाबालिगों की भर्ती करते रहे हैं।