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दुष्कर्म आरोपी बिशप के विरुद्ध प्रदर्शन करने वाली सिस्टर लूसी को मठ छोड़ने का आदेश

एर्नाकुलम में फ्रांसिस्कन क्लैरिस्ट धार्मिक सभा के सुपीरियर जनरल ने सिरो मालाबार चर्च की नन सिस्टर लूसी कलप्पुरा को एक सप्ताह के भीतर मठ छोड़ने का आदेश दिया। लूसी ने दुष्कर्म के आरोपी बिशप फ्रेंको मुलक्कल के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश अपोस्टोलिका सिग्नेट्यूरा के ठीक एक दिन बाद आया है। दरअसल, कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण ने दुष्कर्म के आरोपी पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल के विरोध के बाद उसकी धार्मिक सभा के निर्णय के विरुद्ध लूसी की अपील को खारिज कर दिया और उसे पद से हटाने की बात कही। इस निर्णय के साथ सिस्टर लूसी को चर्च से अंतिम रूप से बर्खास्त कर दिया गया।

चर्च ने सिस्टर लूसी पर एक बदनाम करने वाला अभियान चलाने का आरोप लगाया। अगस्त 2019 में एफसीसी ने सिस्टर लुसी को अनुशासनहीनता के आरोप और जीवनशैली को लेकर आपत्ति जताते हुए निष्कासित कर दिया था। बाद में इसने उन्हें मठ के खिलाफ दायर दो मामलों को वापस लेने और मठ में रहना जारी रखने के लिए बिना शर्त माफी मांगने के लिए विविश किया।

गत वर्ष सिस्टर ने आरोप लगाया था कि उसे मठ से निकालने की योजना के तहत चर्च की ओर से भोजन तक नहीं दिया जा रहा था।

बता दें कि जालंधर सूबा से ताल्लुक रखने वाले मुलक्कल को कोट्टायम मठ में एक नन के साथ कथित तौर पर 13 बार दुष्कर्म करने के लिए पुलिस जाँच का सामना करना पड़ रहा है। जून 2018 में पीड़िता की शिकायत के बाद कई अन्य नन आगे आईं और मुलक्कल पर यौन शोषण का आरोप लगाया।