समाचार
राफेल सौदा- रिलायंस को नहीं दी गई विशेष कर रियायत, फ्रांस में यह सामान्य व्यवहार

राफेल सौदे के बदले रिलायंस को कर में छूट देने के आरोपों के बाद फ्रांस ने अपना पक्ष रखा है। उसने कहा, “अनिल अंबानी की फर्म को बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के कर में छूट दी गई है। यह पूरी प्रक्रिया प्रशासन के नियमों के तहत हुई है।”

बिजनेस टुडे  की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फ्रांसीसी दूतावास के बयान में कहा गया, “टेलीकॉम कंपनी रिलायंस फ्लैग और फ्रेंच टैक्स अथॉरिटीज के बीच जो समझौता हुआ, वो 2008-2012 के बीच को लेकर था। यह बिल्कुल सामान्य व्यवहार है। इसको लेकर आरोप लगाना कि इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप है, यह सरासर गलत है।”

फ्रांस के समाचार पत्र ले मोंदे ने दावा किया था कि 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस दौरे पर जाते हैं और 36 राफेल विमान खरीदने का सौदा करते हैं। इसके एवज में फ्रांस अंबानी के रिलायंस कम्युनिकेशन्स का 143.7 मिलियन यूरो कर माफ करने की घोषणा करती है।

इस खबर के आने के बाद विपक्षी नेताओं और मीडिया ने एनडीए सरकार पर राफेल सौदे के बदले अंबानी को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया। फ्रांस के साथ अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। कहा, “इस विवाद को कानूनी ढाँचे के तहत निपटाया गया है। फ्रांस में काम करने वाली सभी कंपनियों के लिए इस तरह का तंत्र मौजूद है।”

कंपनी का कहना है, “2008 से 2012 के बीच 200 मिलियन रुपयों का परिचालन घाटा हुआ, जबकि फ्रांस सरकार ने 11 बिलियन रुपयों की टैक्स के रूप में मांग की। इसके बाद कंपनी ने आपसी समझौते पर हस्ताक्षर किए और वहां के नियमों के मुताबिक 560 मिलियन रुपये का भुगतान किया।” उधर, विवाद बढ़ता देख रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया कि राफेल मामले और कर मुद्दे के कोई तार आपस में नहीं जुड़े हैं, यह मात्र एक अनुमान है।