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वित्त मंत्रालय ने पहली बार उद्योगों एवं व्यापार संघों से कर की दर पर मांगे सुझाव
आईएएनएस - 14th November 2019

वित्त मंत्रालय ने अगले बजट की तैयारी शुरू कर दी है और इस विषय पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कर और उसकी दरों में बदलाव के लिए उद्योगों एवं व्यापार संघों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

वित्त मंत्रालय का यह निर्णय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की हितधारकों के साथ चर्चा की नीति से मेल खाता है।

वित्त मंत्रालय विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों एवं हितधारकों से बजट पूर्व विचार-विमर्श करता आया है पर पहली बार वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने परिपत्र जारी कर निजी एवं निगमित आय कर और उत्पाद एवं सीमा कर पर सुझाव मांगे हैं।

राजस्व विभाग की ओर से 11 नवंबर को जारी किए गए परिपत्र में आर्थिक औचित्य के साथ सुझाव मांगे गए हैं।

सीतारमण ने 20 सितंबर को देश की कंपनियों पर लगने वाले कॉरपोरेट कर को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया था जिससे अतिरिक्त करों को मिलाकर नगम कर की दर 25.2 प्रतिशत रह जाती है। इस निर्णय से ऐसी कंपनियों को फायदा होगा जिन्हें कर में ना कोई छूट मिलती है ना कोई प्रोत्साहन।

1 अक्टूबर के बाद शुरू हुई विनिर्माण कंपनियों को 25 के बजाए 15 प्रतिशत कॉरपोरेट कर ही देना होगा। इस निर्णय से सरकार को 2019-20 में करीब 1.45 लाख करोड़ का नुकसान होने का अंदेशा है।

भारत की अर्थव्यवस्था छह वर्षों में सबसे कम 5 प्रतिशत पर आ गई है और अतिरिक्त उपाय लागू करने के बावजूद अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने में कुछ और समय लगेगा।

“सरकार की प्रत्यक्ष कर के विषय में मध्यावधि नीति कर प्रोत्साहन, कटौती और छूट के साथ कर की दरों को चरणबद्ध तरीके से युक्तिसंगत बनाना है।”, राजस्व विभाग के परिपत्र में कहा गया।

जीएसटी परिषद में केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों को ही आधिकारिक रूप से आखिरी निर्णय लेने का अधिकार है और जीएसटी सुधार संबंधित अनुरोधों की जाँच वार्षिक बजट में नहीं की जाती।