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एसएफजे की जाँच के लिए एनआईए कार्यालय नहीं पहुँचे किसान नेता, सुरक्षा बढ़ाई गई

एनआईए के नई दिल्ली स्थित कार्यालय के बाहर सोमवार को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। दरअसल, जाँच एजेंसी ने प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) मामले की जाँच के लिए कई लोगों को नोटिस भेजे थे, जिसके तहत उन्हें उपस्थित होना है।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसान संगठनों ने एनआईए द्वारा अपने सदस्यों को जारी किए समन को स्वीकार करने मना कर दिया है। फिर भी कुछ सिख संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पूछताछ में शामिल होने का निर्णय लिया है।

लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसायटी (एलबीआईडब्ल्यूएस) के अध्यक्ष बलदेव सिंह सिरसा को 17 जनवरी को एनआईए कार्यालय में पेश होना था लेकिन उन्होंने संयुक्त किसान मोर्चे के निर्णय का पालन करने की बाध्यता की वजह से जाने से मना कर दिया।

एनआईए ने करीब 40 लोगों को एसएफजे से संबंधित मामले में गवाहों के रूप में जाँच के लिए बुलाया है। पंजाब के सिख यूथ ऑफ पावर के सदस्य परमजीत सिंह अकाली और पलविंदर सिंह अमरकोट जाँच में शामिल होने को दिल्ली रवाना हो गए। अकाली 19 जनवरी और अमरकोट 18 जनवरी को पेश होंगे। सिख यूथ फेडरेशन भिंडरावाले के अध्यक्ष रंजीत सिंह दमदमी को 21 जनवरी को पेश होने को बुलाया गया था और वह उपस्थित भी होंगे।

इसके अलावा, प्रदर्शनकारी किसानों ने हरियाणा के कैथल में शनिवार (16 जनवरी) को कोविड-19 टीकाकरण सेंटर के बाहर पहुँचकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि भाजपा विधायक लीला राम पहले खुद वैक्सीन लगवाएँ। उन्होंने टीकाकरण में शामिल लोगों को वहाँ से जाने के लिए कहा। इसके बाद टीकाकरण केंद्र बदल दिया गया।