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ऋषि गंगा में बनी झील के मुहाने को चौड़ा कर विशेषज्ञों ने त्रासदी की आशंका की कम

30 सदस्यीय विशेषज्ञों के दल ने ऋषि गंगा नदी में बनी झील के मुहाने को चौड़ा किया है, जिसका निर्माण नदी के ऊपर 15 फुट तक हुआ था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह झील उत्तराखंड में चमोली जिले में आई बाढ़ के कारण ऋषि गंगा में बनी थी। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के कमांडेंट नवनीत भुल्लर ने बताया कि झील के चौड़ीकरण के कारण जल निकासी में तेज़ी आई है। इस तरह यह त्रासदी की एक और घटना को रोक देगा।

नवनीत भुल्लर ने कहा, “एक साहसी कोशिश में टीम ने बहुत मुश्किल से क्षेत्र में झील का मुँह चौड़ा किया है, जिससे झील का पानी निकल रहा है। इससे झील के फटने या चमोली जैसी त्रासदी के दोबारा होने की आशंकाएँ कम हो गई हैं।”

झील की गहराई का विश्लेषण वैज्ञानिकों ने भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कर्मियों के साथ किया था। इसके बाद इसका मुंह लगभग 20-35 फीट के अनुपात में खोला गया।

विशेषज्ञ दल में उत्तराखंड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के वैज्ञानिक भी शामिल थे। इसमें आईटीबीपी और एसडीआरएफ के अधिकारी भी थे। दूरस्थ क्षेत्र से संवाद के लिए विशेषज्ञ टीम की सहायता को त्वरित संचार योग्य एंटीना (क्यूडीए) में से एक झील क्षेत्र में तैनात किया गया था। शनिवार को इसकी गहराई मापने के लिए वायुसेना के हेलिकॉप्टर के माध्यम से दो नौसेना गोताखोरों को झील में भेजा गया था।

एसडीआरएफ के डीआईजी रिधिम अग्रवाल ने दावा किया कि माप प्रक्रिया के लिए हाथ से पकड़े गए इकोलोकेशन उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था।