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मध्य प्रदेश सरकार ने रोकी आपातकाल पीड़ितों की पेंशन, बताए वित्तीय कारण

मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने आंतरिक सुरक्षा संरक्षण अधिनियम (मीसा) के तहत आपातकाल के दौरान नज़रबंद किए लोगों को दी जाने वाली पेंशन पर अस्थायी रोक लगा दी है, द इंडियन एक्सप्रेस  ने बताया।

आपातकाल के दौरान जेल में बंद किए गए 2,000 लोगों को लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि नियम के द्वारा मासिक 25,000 रुपए की पेंशन दी जाती थी। लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रमुख बताते हैं कि इनमें से 300 विधवाओं को पेंशन की आधी राशि मिलती है।

वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ को आपातकाल के समय संजय गांधी का करीबी माना जाता था। अब उनकी सरकार ने कॉम्पट्रॉलर एंड ऑडिटर जेनरल (कैग) रिपोर्ट का हवाला देते हुए पेंशन पर रोक लगा दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार योजना पर तय राशि से अधिक व्यय किया जा चुका है। शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 2008 में इस योजना को शुरू किया था।

निर्णय को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए भाजपा ने इस निर्णय पर निशाना साधा है। भाजपा के राज्य सभा सदस्य कैलाश सोनी ने कहा कि पेंशन भुगतान में कभी भी अनियमितताएँ नहीं हुई थीं और कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी इस योजना का लाभ मिलता है।

अगर कांग्रेस इस योजना से कोई छेड़छाड़ करती है तो सोनी ने मामले को न्यायालय में ले जाने की धमकी दी है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा को जवाब देते हुए कहा कि पार्टी अधिपत्र पर भ्रम उत्पन्न कर रही है और इसका उद्देश्य मात्र पारदर्शिता लाना था।