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फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए चुनाव आयोग को मिली आधार की सशर्त सहायता

सभी फर्जी मतदाताओं और प्रतिलिपि प्रविष्टियों को हटाने के लिए उठाए गए एक प्रमुख कदम के तहत रविशंकर प्रसाद की अध्यक्षता वाले केंद्रीय कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार चुनाव आयोग के प्रस्ताव के अनुसार मतदाता पहचान पत्र को आधार के साथ जोड़ने के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए कानूनी अधिकार प्राप्त करने की मांग की गई थी। लेकिन कानून मंत्रालय ने पोल पैनल को आंकड़ों की “चोरी, अवरोधन और अपहरण” रोकने के लिए सुरक्षा उपायों की “गणना” करने के लिए कहा है।

कानून मंत्रालय का यह कदम चुनाव आयोग द्वारा पिछले महीने चुनावी सूची के आँकड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवेदन और इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर सुरक्षा उपायों की एक विस्तृत सूची भेजने के बाद सामने आया है।

सर्वोच्च न्यायालय के “व्यक्तियों की गोपनीयता की रक्षा” के लिए निर्धारित मापदंड में सफल होने के लिए पोल पैनल ने सुरक्षा उपायों की एक विस्तृत सूची भेजी।

आयोग को मतदाता सूची की “सफाई” के लिए आधार आँकड़ों को एकत्र करने और उपयोग करने की शक्तियाँ दी जाने की मांग के साथ अगस्त 2019 में चुनाव आयोग ने प्रस्ताव दिया था कि मंत्रालय को पीपल एक्ट, 1950 और आधार अधिनियम, 2016 में विधायी संशोधन लाना चाहिए।

प्रस्तावित संशोधनों से चुनाव आयोग को आधार आँकड़ों का उपयोग करके मतदाता सूची को साफ करने और जाली एवं फर्जी मतदाताओं के पहचान पत्र को हटाने में सहायता मिलेगी।