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आर्थिक सर्वेक्षण 2020 ने आम व्यक्ति के थाली प्राप्त करने की क्षमता में बढ़ोतरी बताई

आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 को आज (31 जनवरी) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में प्रस्तुत किया। आर्थिक सर्वेक्षण में भारतीय अर्थव्यवस्था के आगामी वित्त वर्ष 2020-21 में 6 से 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है।

अर्थशास्त्र को आम व्यक्ति के हर दिन के जीवन से संबंधित करने के प्रयास में आर्थिक सर्वेक्षण “थालीनॉमिक्स- भारत में खाने की थाली का अर्थशास्त्र” को सामने लाया है। थालीनॉमिक्स पता लगाने का एक प्रयास है कि एक आम व्यक्ति पूरे भारत में एक थाली के लिए कितना भुगतान करता है।

विशेष रूप से पिछले साल के आर्थिक सर्वेक्षण में “व्यवहार अर्थशास्त्र” पर एक अध्याय शामिल था और मनुष्य को मनुष्य के रूप में समझने का एक विनम्र प्रयास किया था न कि स्व-इच्छुक स्व-चालित मशीनें।

सर्वेक्षण के अनुसार अप्रैल 2006 से अक्टूबर 2019 तक 25 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 80 केंद्रों के औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के मूल्य आँकड़े का उपयोग इस अध्यन के लिए किया गया है।

2015-16 को उस वर्ष के रूप में माना जा सकता है जब थाली कीमतों में बदलाव हुआ था। कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ बेहतर और अधिक पारदर्शी मूल्य की खोज हेतु कृषि बाजारों की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए 2014-15 से कई सुधार उपाय पेश किए गए हैं।

पूरे भारत और चार क्षेत्रों में हम पाते हैं कि 2015-16 के बाद से शाकाहारी थाली की पूर्ण कीमतों में काफी कमी आई है, हालाँकि 2019-20 के दौरान कीमत में वृद्धि हुई है।

2015-16 के बाद शाकाहारी थाली के मामले में औसत घर ने प्रति वर्ष 10,887 रुपये की औसत बचत की। इसी तरह, इस अवधि के दौरान दो मांसाहारी थाली खाने वाले आसत घर ने प्रति वर्ष औसतन 11,787 रुपये की बचत की।

एक औसत औद्योगिक कर्मचारी की शाकाहारी थाली खरीदने की क्षमता 2006-07 से 2019-20 के बीच 29 प्रतिशत बेहतर हुई जबकि मांसाहारी थाली की क्षमता में 18 प्रतिशत बढ़त हुई।