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फर्जी मतदान रोकने के लिए आधार जानकारी चाहता है चुनाव आयोग, सरकार से की मांग

मतदाता सूचियों से फर्जी नामों को हटाने के लिए चुनाव आयोग (ईसी) ने सरकार से मौजूदा और नए मतदाताओं की आधार संख्या एकत्र करने के लिए वैधानिक समर्थन का अनुरोध किया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने फर्जी मतदान रोकने के लिए केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा है। इसमें जनप्रतिनिधित्‍व कानून में संशोधन की मांग की गई है। कानून में बदलाव के बाद चुनाव आयोग को नए और पुराने मतदाता पहचान पत्र धारकों के आधार नंबर कानूनी रूप से हासिल करने की स्वीकृति मिल जाएगी।

इससे पूर्व, चुनाव आयोग को अपने महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय मतदाता सूची शुद्धिकरण और प्रमाणीकरण कार्यक्रम (एनईआरपीएपी) को रोकना पड़ा था। इसे मार्च 2015 में शुरू किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय के अगस्त 2015 के आदेश के बाद केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और एलपीजी योजनाओं के लिए आधार के उपयोग को सीमित कर दिया गया था।

एनईआरपीएपी के तहत चुनाव आयोग ने फर्जी प्रविष्टियों (डुप्लीकेट, फर्जी, अयोग्य और स्थानांतरित मतदाताओं) को हटाने के लिए आधार संख्या को चुनावी फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) डाटाबेस से जोड़ने की योजना बनाई थी।

हालाँकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया था कि आधार संख्या एकत्र करने के लिए वैधानिक समर्थन की आवश्यकता होगी। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, “अदालत के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि आधार संख्या को इकट्ठा करने के लिए कानून की स्वीकृति जरूरी है। आयोग ने कानून में बदलाव का प्रस्ताव दिया है।”