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धातु-आयन बैटरी विकसित कर चीन के लिथियम-आयन को हावी न होने देने के लिए तैयारी

लिथियम आयन बैटरी के क्षेत्र में चीन के हावी होने और उसपर से निर्भरता कम करने के उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार धातु-आयन और धातु-वायु बैटरी जैसी नई प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया को रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में सड़क परिवहन मंत्रालय ने शोध करने के लिए रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और आईआईटी कानपुर जैसी एजेंसियों के काम करने की योजना बनाई है।

बताया गया है कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लिथियम आयन तकनीक के अलावा वाहनों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली बैटरी के अन्य विकल्पों को तलाशने का एक रोड मैप तैयार करने को एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है।

इससे पूर्व, जनवरी में नितिन गडकरी ने अग्रणी बैटरी और पावर-ट्रेन प्रौद्योगिकियों को विकसित करने में प्रमुख रूप से उभरने की आवश्यकता पर जोर दिया था।उन्होंने यह देखते हुए कहा था कि वर्तमान में हमारे सामने आने वाली चुनौती लिथियम के रणनीतिक भंडार पर नियंत्रण करना है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए लिथियम-आयन रिचार्जेबल बैटरी के निर्माण के रूप में किया जाता है।

गडकरी ने इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र को आगामी वर्षों में पूरी तरह से स्वदेशी बैटरी प्रौद्योगिकी की ओर स्थानांतरित करने का आह्वान किया था। इस शोध और विकास को लेकर बनाई जा रही योजनाओं में धातु-वायु, धातु-आयन और अन्य संभावित प्रौद्योगिकियाँ हो सकती हैं। बैटरी क्षेत्र (एसीसी) के लिए पीएलआई योजना में 18,100 करोड़ रुपये का प्रभावशाली आवंटन प्राप्त हुआ है।