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“पुलिस बल प्रयोग नहीं करती तो हिंसा हो सकती थी”- रविदास मंदिर प्रदर्शन पर स्थानीय

राजधानी दिल्ली की तुगलकाबाद में पुलिस बल और रविदास मंदिर निर्माण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प पर स्थानीय लोगों ने कहा है कि अनियंत्रित भीड़ ने हमारे संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया और उनके हिंसक कार्यों के कारण इलाक़े में आतंक जैसी स्थिति बनी।

बुधवार (21 अगस्त) शाम को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल किया।

अगले दिन भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद सहित 96 लोगों को दंगा, गैर-कानूनी तरीके से एकत्रित होने के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहाँ उन्हें 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया।

झड़पों को याद करते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि पुलिस ने अगर बल प्रयोग का सहारा नहीं लिया होता तो बड़े पैमाने में लोग हताहत हुए होते।

द हिंदू  से बात करते हुए स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी और बीकानेर स्वीट के मालिक ने बताया, “शाम सात बजे के आसपास पुलिस ने हमें दुकान बंद करने को कहा, जब उन्होंने भीड़ को तुगलकाबाद की ओर आते देखा। हमने तुरंत शटर गिरा दिए। मेरी दुकान के अंदर कुछ ग्राहक थे, जिन्हें बाहर निकलने से पहले एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा।”

उन्होंने आगे कहा कि भीड़ ने उनकी दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे को तोड़ दिया और काउंटरों को मेरी दुकान के बाहर फेंक दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पास के एक पार्क से पत्थर और ईंटे उठा ली थी।

एक अन्य स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी ने द हिंदू  को बताया, “हाथ में लाठी, तलवार और हॉकी डंडा के साथ हज़ारों प्रदर्शनकारी थे। अगर पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो किसी निर्दोष को पथराव से चोट पहुँच सकती थी।” उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शनकारियों की आतंक से त्रस्त कई लोगों ने सुरक्षा के लिए उनके निवास में प्रवेश किया।