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एस-400 रक्षा मिसाइल प्रणाली 2025 तक भारत को सौंपेगा रूस, पहली खेप अक्टूबर में

शुक्रवार (17 जनवरी) को रूस ने कहा कि पाँच एस-400 वायु रक्षा प्रणाली को 2025 तक भारत में तय कार्यक्रम के तहत पहुँचाया जाएगा।

एक प्रेस वार्ता के दौरान भारत में मिशन के रूसी उप-प्रमुख रोमन बाबूसकिन ने कहा कि एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों का उत्पादन पहले ही शुरू हो गया था।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “हम 2025 तक पाँच एस 400 मिसाइल रक्षा प्रणाली भारत को सौंप देंगे। रूस की रक्षा प्रणाली दुनिया की सर्वश्रेष्ठ रक्षा प्रणालियों में से एक है और यह भारतीय सुरक्षा के लिए अच्छा काम करेगी।”


भारत ने 2018 में एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की खरीद के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और इस समझौते के साथ आगे बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की है।

एस-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है जिसकी पहली खेप अक्टूबर 2020 तक भारत पहुँच जाएगी और शेष मिसाइलों के 2023 तक भारतीय वायु सेना में शामिल होने की उम्मीद है।

बाबुश्किन ने यह भी कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को इस वर्ष भारत में रूस द्वारा निर्मित 5000 कलाश्निकोव मशीन गन की पहली खेप प्राप्त होगी।

इसके साथ ही, अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद 60 केए-2267 हेलीकॉप्टर की आपूर्ति की जाएगी और 140 हेलीकॉप्टरों का उत्पादन भारत में किया जाएगा। भारत में मिशन के रूसी उप-प्रमुख ने कहा कि सैन्य हार्डवेयर के अतिरित पुर्जों के संयुक्त उत्पादन पर समझौते को जल्द ही लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रूसी-भारतीय जेवी ब्रह्मोस की सफलता के मद्देनजर दोनों देश मिसाइल सटीकता, दूरी और गति को और उन्नत कर रहे हैं।

“यह एक अनूठा हथियार है, यहाँ तक ​​कि कई विकसित देशों के पास भी नहीं है। तीसरे मोर्चे वाले दुनिया के देशों में इसकी मांग बहुत अधिक है। सभी विकल्प हमारे सामने हैं। आगे बढ़ने के लिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाए।”, बाबुश्किन ने कहा।

(इस खबर को आईएएनएस की सहायता से प्रकाशित किया गया है।)