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प्रदूषण के लिए दिल्ली सरकार का ‘2.3 प्रतिशत’ प्रयास, न्यायालय ने मांगा जवाब

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार (13 मार्च) को दिल्ली सरकार से जवाब मांगा कि 30,000 अवैध उद्योग इकाइयों के स्थान पर केवल 692 इकाइयों की ही बिजली आपूर्ति क्यों काटी गई। 4 फरवरी को न्यायालय ने 30,000 इकाइयों की बिजली व पानी आपूर्ति काटने के लिए सरकार को चार सप्ताह का समय दिया था।

वास्तव में जिन उद्योग इकाइयों की बात हो रही है, वे रहवासी इलाकों में स्थित हैं व नियमों के अनुसार अवैध हैं जिनके कारण प्रदूषण फैल रहा है। न्यायाधीश अरुण मिश्रा व दीपक गुप्ता की पीठ ने पाया कि पहले 30,000 इकाइयों की आपूर्ति बंद की जाने की बात हुई थी।

“दिल्ली सरकार द्वारा 27 फरवरी 2019 को दायर की गई अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार 692 इकाइयों की बिजली आपूर्ति काटी गई है, जबकि पहले यह आँकड़ा 30,000 औद्योगिक इकाइयों का था।”, पीठ ने कहा।

न्यायालय ने सरकार से सफाई मांगी है कि यह आँकड़ा घटकर 692 का कैसे हो गया। साथ ही उद्योगों के आयुक्त व प्रमुख सचिव एवं दिल्ली सरकार से शपथ-पत्र में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रिल को होगी।