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उर्दू-फारसी शब्दों के एफआईआर में होने की होगी जाँच, दिल्ली पुलिस को किया था मना

दिल्ली पुलिस को उर्दू-फारसी शब्दों के प्रयोग से बचने का निर्देश देने के बाद अब न्यायालय देखना चाहता है कि पुलिस इसका कितना अनुसरण कर रही है। सोमवार (25 नवंबर) को इसकी जाँच के लिए न्यायालय ने 100 एफआईआर की प्रतियाँ प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

ये प्रतियाँ अगली सुनवाई, 11 दिसंबर से पहले प्रस्तुत की जानी है। इसके लिए 10 अलग-अलग थानों से 10 एफआईआर प्रतियाँ जमा करनी होंगी, द इंडियन एक्सप्रेस  ने रिपोर्ट किया।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 383 उर्दू-फारसी शब्दों की सूची एक परिपत्र के माध्यम से सभी थानों में पहुँचाई थी ताकि पुलिस इन शब्दों के प्रयोग से बचे। न्यायालय का मानना है कि एफआईआर किसी भी मामले की सबसे महत्त्वपूर्ण पूंजी होती है व यह आम आदमी के समझने योग्य होनी चाहिए।

यह निर्णय अधिवक्ता विशालाक्षी गोयल की जनहित याचिका पर 7 अगस्त 2019 को सुनाया गया था। इसमें राज़ीनाम, गफलत, इत्तला, मुलाकी, तफ्तीश, मजरूब, तहरीर, फरमाया आदि उर्दू-फारसी शब्दों का प्रयोग न करने का आदेश दिया था।