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चर्च ने 60 करोड़ रुपये में बेंगलुरु मेट्रो को बेची रक्षा भूमि, मंत्रालय ने दर्ज कराया मामला

रक्षा मंत्रालय ने दक्षिण भारत के चर्च (सीएसआई) के खिलाफ मंत्रालय से संबंधित एक ज़मीन पर मालिकाना हक के झूठे दावे का मामला दर्ज करवाया है। सीएसआई ने बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) और कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) से उस जगह पर अपने स्वामित्व के बदले 60 करोड़ रुपये का भुगतान भी करवाया।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, बीएमआरसीएल ने वेल्लारा जंक्शन भूमिगत स्टेशन के निर्माण के लिए डेयरी सर्कल से नागवारा तक रेड लाइन पर भूमि का अधिग्रहण किया। उसने दायरे में आने वाले टॉम के होटल और फातिमा बेकरी जैसे किरायदारों द्वारा कब्ज़ा की गई 3,618 वर्ग मीटर चर्च भूमि का भी अधिग्रहण किया। उस वक्त सीएसआई को मुआवजे के रूप में 60 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।

रक्षा मंत्रालय के रक्षा संपदा कार्यालय (डीईओ) ने भूमि पर चर्च के दावे की जाँच के लिए सर्वेक्षण करवाया। मंत्रालय ने मुआवजे के दावे को रोक दिया। डीईओ (कर्नाटक सर्कल) ने ऑल सेंट्स चर्च और बीएमआरसीएल को जुलाई के पहले सप्ताह में लिखा था, “चर्च की भूमि रक्षा भूमि का हिस्सा थी। सर्वेक्षण नंबर 275 में बेंगलुरु के सिविल और सैन्य स्टेशन, जिसे 1865,1884 और 1898 में चर्च को क्वार्टर मास्टर जनरल (क्यूएमजी) ने पट्टे पर दिया था।” पत्र में मांग की गई कि जमीन रक्षा मंत्रालय की है तो मुआवजे का भुगतान भारत सरकार के कोष में होना चाहिए।

भारत का दूसरा सबसे बड़ा ईसाई चर्च सीएसआई देश का सबसे बड़ा प्रोटेस्टेंट संप्रदाय है। यह एंग्लिकन मेथोडिस्ट, कांग्रेगेशनल, प्रेस्बिटेरियन और रिफॉर्मेड संप्रदायों से संबंधित चर्चों का एक संघ है। दक्षिण भारत में सीएसआई की संपत्ति 1 लाख करोड़ होने का अनुमान है। यह कथित तौर पर दान व अन्य तरीकों से करीब 1,000 करोड़ सालाना हासिल करता है। यह दक्षिणी भारत में 5,000 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों का प्रबंधन और संचालन करता है।