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बीपीसीएल के निजीकरण का रास्ता साफ, केंद्र की 100% प्रत्यक्ष विदेश निवेश की अनुमति

केंद्र सरकार ने गुरुवार (29 जुलाई) को तेल एवं गैस सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) में स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दे दी। इससे अब भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) के निजीकरण का मार्ग आसान होता प्रतीत हो रहा है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने कहा, “ऐसे पीएसयू में 100 प्रतिशत विनिवेश की अनुमति दी जाएगी, जिनमें रणनीतिक विनिवेश के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है।” ऐसे में सरकार कंपनी में अपनी पूरी 52.58 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा एक प्रेस नोट में कहा गया, “सरकार द्वारा किसी सार्वजनिक उपक्रम के रणनीतिक विनिवेश के लिए सैद्धांतिक अनुमोदन के मामले में स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत तक के विदेशी निवेश की अनुमति है।”

इस संबंध में निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह लिया था। बीपीसीएल में सरकार की संपूर्ण 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए प्रारंभिक रुचि पत्र (ईओआई) देने वाली तीन कंपनियों में से दो विदेशी संस्थाएँ हैं।

इसमें माइनिंग-टू-ऑइल समूह वेदांता भारतीय कंपनी है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका स्थित निजी इक्विटी कंपनी अपोलो ग्लोबल और आई स्क्वॉयर कैपिटल की शाखा थिंक गैस है। ये तीनों बीपीसीएल में सरकार की हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में हैं।