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सेंट्रल विस्टा को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास गतिविधियों को रोकने से मना करने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय को अब सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। विशेष अनुमति याचिका वकील प्रदीप कुमार की ओर से दायर की गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय में होने वाली कार्यवाही में वकील प्रदीप कुमार पक्षकार नहीं थे।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में कहा गया कि कोविड की दूसरी लहर के चरम पर उच्च न्यायालय द्वारा परियोजना को आवश्यक गतिविधि बताना उचित नहीं है। वह भी तब जब पूरे देश में लॉकडाउन के दौरान आवश्यक कार्यों को रोक लगी हुई है।

याचिका में कहा गया कि उच्च न्यायालय का कहना उचित नहीं था कि श्रमिक परियोजना स्थल पर रह रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार और सेंट्रल विस्टा परियोजना का निर्माण करने वाली कंपनी एसपीसीपीएल ने अपने-अपने हलफनामे में कहा था कि मजदूर सराय काले खां के शिविर में रह रहे थे, जो परियोजना स्थल नहीं है।

सराय काले खां से मजदूरों और पर्यवेक्षकों को लाने- ले जाने के लिए आवाजाही पास जारी किया गया था। बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने गत 5 जनवरी को भूमि उपयोग और पर्यावरण मानदंडों के कथित उल्लंघन का परियोजना पर आरोप लगाने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

इसके बाद कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके संक्रमण के चलते निर्माण गतिविधियों को पूरी तरह रोकने की मांग की गई थी।