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भारतीय स्टार्टअपों ने 2019 में कीर्तिमान बनाते हुए 1 लाख करोड़ की फंडिंग अर्जित की

भारतीय स्टार्टअपों के लिए 2019 बेहतरीन वर्ष रहा। इसने 2019 में 14.5 अरब डॉलर का रिकॉर्ड बनाया, जो मोटे तौर पर करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये है। टेक क्रंच की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष के 75,000 करोड़ रुपये के आँकड़े के मुकाबले यह लगभग 37.73 प्रतिशत से अधिक है।

भारतीय स्टार्टअपों के लिए यह अप्रत्याशित लाभ 817 निवेशकों से 1,185 दौर की फंडिंग से निकलकर आया। शुरुआती चरण के स्टार्टअप, जिन्होंने फंडिंग के लिए संघर्ष किया, उनमें वर्ष दर वर्ष 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उनके मूल्यांकन में भी 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अलावा, इस वर्ष पुराने तरीके वाले वीसी फंडिंग, चार आईपीओ लॉन्च किए गए और 128 अधिग्रहण किए गए।

इस दशक की शुरुआत भारतीय स्टार्टअपों ने बढ़ोतरी के साथ 3,900 करोड़ रुपये में की, जो कि केवल 10 वर्षों में 1.02 लाख करोड़ हो गई है। इस दशक में निवेश लगभग 25 गुना बढ़ गया।

सिकोइया कैपिटल इस वर्ष भारतीय स्टार्टअप परिदृश्य में सबसे सक्रिय उद्यम पूंजी कोष रहा क्योंकि इसने 50 से अधिक निवेशों में भाग लिया। एक्सेल ने 40 से अधिक निवेशों और टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट, ब्लम वेंचर्स व चिराटे वेंचर्स बाकी शीर्ष पाँच पदों पर रहे।

मायोशी सोन की अगुआई वाली सॉफ्टबैंक ने ओयो रूम्स और पेटीएम जैसी कंपनियों की फंडिंग से बाजार में धूम मचाई। उन्होंने इस वर्ष क्रमशः 10,650 करोड़ और 7,100 रुपये जुटाये।

हॉस्पिटैलिटी उद्योग के होटल एग्रीगेटर्स ने सबसे अधिक धन जुटाया। ओयो रूम्स, ट्रीबो होटल्स और फैब होटल्स सहित फर्मों ने कुल मिलाकर करीब 12,000 करोड़ रुपये जुटाये।

बेंगलुरु कुल इक्विटी फंडिंग के लगभग आधे हिस्से को बनाने में कामयाब रहा है। भारत के स्टार्टअप दृश्य में मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और मुंबई हैं। बेंगलुरु ने 2016 के बाद से मुंबई और दिल्ली की तुलना में अधिक पूंजी प्रवाह देखा। यह आँकड़ा 1.42 लाख करोड़ रुपये का है।