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“डीबीटी की संख्या गत वर्ष की अपेक्षा 37% बढ़कर 3.9 करोड़ हुई”- यूआईडीएआई प्रमुख

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के माध्यम से की जाने वाली लेन-देन संख्या वर्ष 2020 के 2.8 करोड़ की अपेक्षा इस वर्ष अब तक 37 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3.9 लाख करोड़ पर पहुँच गई है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस विकास को यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी सौरभ गर्ग ने साझा किया। वह इकोनॉमिक टाइम्स की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष डीबीटी योजना के तहत केंद्र द्वारा हस्तांतरित राशि 68,903 करोड़ रुपये थी।

उन्होंने बल देकर कहा कि वित्तीय समावेशन न केवल एक वांछनीय उद्देश्य है बल्कि आज एक विकासात्मक अनिवार्यता है। सरकार ने वित्तीय समावेशन की दिशा में कई कदम उठाए हैं। विशेष रूप से बैंक खाता खोलने के अभियान के लिए, जिससे अब 42 करोड़ खाते खोलने में सहायता मिली है।

डीबीटी आधारित नकद हस्तांतरण में पेंशन, उर्वरक सब्सिडी, अब जारी ना रहने वाली एलपीजी सब्सिडी, केंद्र से कोविड से संबंधित नकद सहायता और केंद्र और राज्य प्रशासन के तहत कई अन्य योजनाएँ शामिल हैं। सब्सिडी प्रणाली में रिसाव को रोकने में सहायता के लिए इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है।