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अनुसूचित जाति का व्यक्ति इस्लाम या ईसाइयत स्वीकारने पर आरक्षण लाभ के योग्य नहीं

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार (12 फरवरी) को संसद में बताया कि भारत के संविधान और भारतीय कानून के अनुसार, अनुसूचित जाति के लोगों की तरह आरक्षण लाभ के लिए पात्र हिंदू व्यक्ति ईसाइयत या इस्लाम में धर्मांतरित होने पर समान लाभ नहीं उठा सकता है।

आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की पात्रता पर बोलते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, “संविधान के अनुच्छेद 3 (अनुसूचित जाति) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।।” उन्होंने यह बात भाजपा के सदस्य जीवीएल नरसिंहा राव के एक प्रश्न के उत्तर में कही।

1950 में नेहरू सरकार ने अनुसूचित जाति की परिभाषा को केवल हिंदू धर्म के सदस्यों के लिए सीमित कर दिया था, जो बाद में 1956 में सिखों और 1990 में बौद्धों के लिए बढ़ा दी गई थी। इससे पूर्व, सर्वोच्च न्यायालय ने भी माना था कि जातिगत लाभ केवल भारतीय समुदायों को मिलता है।

न्यायालय ने 2015 के एक निर्णय में कहा था, “एक बार जब व्यक्ति हिंदू से ईसाई बन जाता है तो हिंदू धर्म की वजह से होने वाली सामाजिक और आर्थिक अक्षमता समाप्त हो जाती है। इसी वजह से उसे सुरक्षा देना आवश्यक नहीं है और उसे अनुसूचित जाति का नहीं माना जाता है।”