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भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार सख्त, 15 वरिष्ठ अधिकारियों को किया बर्खास्त

भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार ने कार्रवाई जारी रखते हुए प्रधान आयुक्त के रैंक सहित 15 वरिष्ठ सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मूल नियमावली के रूल 56(जे) के तहत सरकार ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अफसरों को बर्खास्त कर दिया है। इनमें प्रधान आयुक्त से लेकर सहायक आयुक्त स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कुछ अधिकारी पहले से निलंबित चल रहे थे। इन पर सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए थे या वे रिश्वत, जबरन वसूली और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में शामिल थे।

एएनआई के मुताबिक, सेवानिवृत्त हुए अधिकारी

– डॉ. अनूप श्रीवास्तव, मुख्य आयुक्त
– अतुल दीक्षित, आयुक्त
– संसार चंद, कमिश्नर
– जी श्री हर्ष, आयुक्त
– विनय बृज सिंह, आयुक्त
– अशोक आर माहिदा, अतिरिक्त आयुक्त
– वीरेंद्र के अग्रवाल, अतिरिक्त आयुक्त
– अमरेश जैन, उपायुक्त
– नलिन कुमार, संयुक्त आयुक्त

मोदी सरकार ने 12 वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को बर्खास्त करने के लिए एक ही नियम लागू किया था। इसमें एक मुख्य आयुक्त, प्रधान आयुक्त और आयकर विभाग के आयुक्त शामिल थे। इनमें से कुछ को भ्रष्टाचार और गैर-कानूनी संपत्ति रखने और यौन उत्पीड़न का दोषी पाया गया था।

बर्खास्त अफसरों में प्रधान आयुक्त अनूप श्रीवास्तव भी शामिल हैं, जो दिल्ली में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड में प्रिंसिपल एडीजी (ऑडिट) के पद पर कार्यरत थे। सीबीआई का आरोप था कि उन्होंने एक हाउस बिल्डिंग सोसायटी को फायदा पहुँचाया, जो नियमों की अनदेखी कर जमीन खरीद के लिए एनओसी पाने की कोशिश कर रही थी।

सीबीआई ने 2012 में अनूप श्रीवास्तव के खिलाफ टैक्स चोरी मामले को छुपाने के लिए एक आयातक से कथित तौर पर घूस माँगने और लेने का मामला दर्ज किया था। उनके खिलाफ गिरफ्तारी, उत्पीड़न और जबरन वसूली की शिकायतें थीं।