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ग्राहक ही राजा? उपभोक्ता सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पारित, मिलेंगे नए अधिकार

गुरुवार (20 दिसंबर) को लोक सभा ने उपभोक्ता सुरक्षा विधेयक 2018 पारित कर दिया, फाइनेन्शियल एक्सप्रेस  ने बताया। राजीव गांधी सरकार द्वारा लाए गए दशकों पुराने उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम 1986 के स्थान पर यह विधेयक लाया गया।

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) जिसने इस विधेयक का प्रारूप बनाया था, ने इसका मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा, “उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हेतु और उपभोक्ता विवादों को समय पर और प्रभावशाली प्रशासन द्वारा सुलझाने हेतु प्राधिकरणों की स्थापना।”

इस विधेयक की मुख्य बात है कि इसमें केंद्रीय उपभोक्ता सुरक्षा प्राधिकरण नामक एक शीर्ष संस्था की स्थापना का प्रावधान है जो उपभोक्ताओं के अधिकारों के प्रचार और रक्षा के साथ-साथ उन्हें लागू करने का कार्य करेगी। जबकि 1986 के विधेयक में इस प्रकार के प्राधिकरण की बात नहीं कही गई थी।

वर्ग कार्रवाई, उत्पाद दायित्व, भ्रामक प्रचार, प्रचारक दायित्व, आदि से निपटने के लिए प्रक्रियाओं के साथ-साथ विधेयक में ई-कॉमर्स, सीधी बिक्री और टेलीमार्केटिंग (टीवी द्वारा व्यापार) के लिए भी प्रवाधान दिए हैं।

यह विधेयक उपभोक्ता को निवास या कार्य स्थान से ही विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज करने का अधिकार देता है। “ये आयोग जिले, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर गठित किए जाएँगे जिसमें धन-संबंधी अधिकार क्षेत्र क्रमशः 1 करोड़, 1 करोड़ से 10 करोड़ व 10 करोड़ से अधिक होगा।”, विधेयक में उल्लेखित है।

इस विधेयक को कानून बनाने के लिए इसका राज्य सभा में पारित होना व राष्ट्रपति से स्वीकृति मिलना आवश्यक है।