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एलएसी पर तैनात कमांडरों को मिली पूर्ण स्वतंत्रता, आरओई में 45 वर्षों बाद संशोधन

लद्दाख की गलवान घाटी में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद रूल्स ऑफ इंगेजमेंट (आरओई) में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव कर भारती सेना ने एलएसी पर तैनात कमांडरों को कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता दी है। दो वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त में यह जानकारी दी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा, “कमांडर अब हथियार के उपयोग को लेकर प्रतिबंध से बंधे नहीं होंगे। खराब स्थितियों से निपटने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग कर उनके पास जवाब देने का पूर्ण अधिकार होगा।”

आरओई में यह संशोधन 45 वर्षों के बाद हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। उन्होंने कहा था कि सेना को सीमा पर ज़रूरी कदम उठाने की स्वतंत्रता दी जाती है। इस तरह भारत ने कूटनीतिक माध्यम से अपनी स्थिति चीन को बता दी थी।

दूसरे अधिकारी ने बताया, “आरओई में बदलाव के बाद कुछ ऐसा नहीं है, जो कमांडरों की क्षमता को सीमित करे। अब वे एलएसी पर ज़रूरी कार्रवाई कर सकते हैं। चीनी सैनिकों द्वारा अपनाई जाने वाली क्रूर रणनीति का जवाब देने के लिए आरओई में संशोधन हुआ है।”

उन्होंने कहा, “15 जून से पूर्व पाँच-छह मई को पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी। हर बार वे भारी संख्या में आए और हमारे सैनिकों पर लोहे की रॉड में कील और बेंत में लगे नुकीले तारों से उन पर हमला किया। हमारे सैनिकों ने निडर होकर लड़ाई लड़ी पर अब आरओई पर गौर करना जरूरी था।”

उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल कहा, “चूँकि सैनिकों को एलएसी पर गश्त के दौरान हथियार ले जाने की अनुमति है इसलिए यह अंतर्निहित है कि वे गलवान घाटी में हमले जैसी अभूतपूर्व स्थितियों में हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं।”