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कोयला उत्पादन में 14.4 करोड़ टन की वृद्धि, यूपीए के 10 साल से बेहतर ये पाँच वर्ष

कोयला उत्पादन के मामले में अपने पाँच साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीए सरकार को पछाड़ दिया है। पिछले पाँच वर्षों में कोयला उत्पादन में 14.4 करोड़ टन की वृद्धि हुई है। वहीं, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के 10 साल के कार्यकाल 2004 से 2014 के बीच 13.8 करोड़ टन कोयला उत्पादन में वृद्धि हुई थी। इस प्रकार मोदी सरकार ने 5 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन में वृद्धि की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया  की रिपोर्ट के अनुसार, 2004-05 में जब यूपीए सरकार आई थी, तब कोयला उत्पादन 32.36 करोड़ टन प्रति वर्ष हुआ करता था। इसके बाद यूपीए सरकार इसे बढ़ाकर 10 वर्षों में 46.24 करोड़ टन प्रति वर्ष पर लेकर आई।

मोदी को 46.24 करोड़ टन का वार्षिक कोयला उत्पादन यूपीए सरकार से मिला। इसे बढ़ाकर वे 53.88 करोड़ टन पर ले गए। 2018-19 की बात करें तो कोयले का वार्षिक उत्पादन 60.69 करोड़ टन हो गया।

कोयला मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “यह सफलता स्पष्ट दृष्टिकोण और सही दिशा से मिली है। रेलवे और कोयला मंत्रालय बिजली व अन्य मंत्रालयों के साथ एक टीम के तौर पर काम कर रहे हैं। वन और पर्यावरण मंत्रालय के साथ बेहतर समन्वय भी स्थापित किया गया है, जिससे खदान के विस्तार और निकासी परियोजनाओं के लिए तेजी से मंज़ूरी मिली है।”

सरकार ने कोयला उत्पादन क्षेत्र में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का एकाधिकार भी खत्म कर दिया है। साथ ही कोयला उत्पादन के क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया है। इसके लिए फरवरी 2018 में मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निजी कंपनियों को देश में कोयला खनन करने की अनुमति दे दी थी।