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पशुपालन विभाग में वित्तीय अनियमितता पर मुख्यमंत्री ने किया दो डीआईजी को निलंबित

उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग में करोड़ों रुपये का घोटाला करने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्रवाई करते हुए दो डीआईजी को निलंबित कर दिया। इनमें डीआईजी रूल्स और मैनुअल दिनेश दुबे और डीआईजी पीएसी अरविंद सेन हैं।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मुहिम जारी है। दोनों निलंबित अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इससे पूर्व, मामले में आरोपियों के मददगार और बाराबंकी में तैनात हेड कांस्टेबल दिलबहार सिंह को निलंबित किया गया था।

एसटीएफ के मुताबिक, पीड़ित मंजीत ने सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी (अब डीआईजी) अरविंद सेन पर इन लोगों से मिलीभगत कर पीड़ित को धमकाने का आरोप लगाया था। एसटीएफ की जाँच में पता चला कि तब सीबीसीआईडी में एसपी अरविंद सेन थे। वह अभी डीआईजी थे और पीएसी सेक्टर आगरा में तैनात थे। जाँच में उन पर धमकाने का आरोप सही पाया गया।

गिरफ्तार लोगों ने सचिवालय में पशुपालन विभाग का फर्जी दफ्तर बनाकर फर्जीवाड़ा किया था। मामले के तूल पकड़ने पर शासन ने जाँच जल्दी पूरी कर सभी आरोपियों को पकड़ने को कहा था। जाँच में ही सामने आया था कि गिरफ्तार आरोपियों के एक और आईपीएस डीसी दुबे से संबंध हैं। ये भी इस समय डीआईजी हो चुके हैं और रूल्स एंड मैनुअल्स में तैनात हैं।

पशुपालन विभाग के इस फर्जीवाड़े में पशुधन राज्यमंत्री जयप्रताप निषाद के निजी प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, निजी सचिव धीरज कुमार देव, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार आशीष राय, अनिल राय, कथित पत्रकार एके राजीव, रूपक राय और उमाशंकर को 14 जून को गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ इंदौर के व्यापारी मंजीत भाटिया ने शासन में शिकायत की थी।