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“धर्मों के आक्रामक प्रचार से मूल निवासियों की संस्कृति समाप्त हो रही”- असम मुख्यमंत्री

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मूल निवासियों की आस्था और संस्कृति पर शोध के लिए नए बने विभाग पर चर्चा करते हुए कहा, “दुनिया के स्थापित धर्मों द्वारा बड़े स्तर पर प्रचार किए जाने से मूल निवासियों की संस्कृति समाप्त हो रही है।”

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने विधानसभा सत्र के शून्यकाल में कहा, “बोडो और मिसिंग जनजातियाँ, बाथोउ व दोनई पोलो परंपरा को मानती हैं। ये मूल निवासियों की संस्कृति का हिस्सा हैं।”

उन्होंने कहा, “मिसिंग जनजाति दोनई पोलो परंपरा को मानती है। बाथोउ परंपरा को मानने वाले वृक्षों की पूजा करते हैं। दोनई पोलो संस्कृति को मानने वाले सूरज और चंद्रमा की पूजा करते हैं। हालाँकि, संस्कृतियों के विस्तार और अलग-अलग समूहों व धर्मों के ज़बरदस्त प्रचार करने के कारण मूल निवासियों की संस्कृति समाप्त होने की ओर है।”

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “आदिवासी समुदाय के लोग की अपनी भाषा तक लुप्त होती जा रही है। वहीं, मंदिरों, मस्जिदों और चर्च को दान मिल रहे हैं। प्रकृति की पूजा करने में विश्वास करने वालों को किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है।