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एनआरसी को रंजन गोगोई ने भविष्य का आधार दस्तावेज, मीडिया को गैर-ज़िम्मेदार बताया

17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने रविवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अभ्यास के पर्यवेक्षण की सराहना की और इसे भविष्य के लिए आधार दस्तावेज बताया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पोस्ट कॉलोनियल असम शीर्षक वाली पुस्तक के विमोचन पर रंजन गोगोई ने कहा, “यह उचित परिप्रेक्ष्य में चीजों को लगाने का एक मौका है। असम में एनआरसी के दौरान 19 लाख या 40 लाख लोगों को नागरिकता नहीं मिली, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन ये दस्तावेज भविष्य के लिए ज़रूरी हैं। एनआरसी कोई अस्थाई दस्तावेज नहीं है। यह भविष्य में मददगार होगा।”

मुख्य न्यायाधीश ने कुछ मीडिया हबों की इसको लेकर की गई गैर ज़िम्मेदाराना कवरेज को भी गलत बताया। उन्होंने कहा, “संवेदनशील मामले पर इस तरह की रिपोर्टिंग से स्थिति खराब हो गई है। अवैध प्रवासियों की संख्या के साथ यह पता लगाने की तत्काल आवश्यकता थी कि एनआरसी के मौजूदा अभ्यास ने क्या किया था।”

ध्यान देने वाली बात यह है कि एनआरसी का अंतिम मसौदा दो महीने पहले 31 अगस्त को प्रकाशित किया गया था। इसके अनुसार, 19 लाख से अधिक व्यक्तियों को भारत के नागरिकों की सूची में शामिल नहीं किया गया था। पूरी प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसकी निगरानी भी की गई थी।