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नागरिकता संशोधन विधेयक का प्रस्ताव स्वीकृत, शिवसेना कर रही संतुलन का प्रयास

सोमवार (9 दिसंबर) को गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को प्रस्तुत किया जिसके प्रस्तावित होने पर सदन ने 293 हाँ और 82 ना से सहमति जताई।

इसी बीच महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार को झटका लगा है क्योंकि संभवतः शिवसेना इस विधेयक का समर्थन कर रही है। शिवसेना के कदम की घोषणा करने के लिए संजय राउत ने ट्विटर पर लिखा, “अवैध घुसपैठियों को बाहर निकाल दिया जाना चाहिए। अप्रवासी हिंदुओं को नागरिकता मिलनी चाहिए।”

हालाँकि राउत ने उन्हें मताधिकार न देने की बात की। साथ ही भाजपा पर निशाना साधते हुए कश्मीरी पंडितों की स्थिति पर प्रश्न किया, “क्या वे आर्टिकल 370 हटने के बाद वापस कश्मीर लौट गए?”

वहीं अमित शाह ने स्पष्ट किया, “यह बिल 0.001 प्रतिशत भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। नागरिकता संशोधन विधेयक पर राजनीतिक खेमेबंदी की तस्वीर साफ हो गई है। घटक और बीजद जैसे मित्र दलों के समर्थन के बूते एनडीए सरकार ने बिल को पारित कराने की तैयारी कर ली है।”

नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न से भाग रहे हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों, पारसियों, जैन और बौद्धों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान करने की कोशिश है। इस विधेयक को पहले ही कांग्रेस ने “असंवैधानिक” बताया था। पार्टी इसका जमकर विरोध कर रही है।

विधेयक में मुस्लिम को छोड़ देने को लेकर अल्पसंख्यक गुटों ने भी इसका विरोध किया है। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान ऐलान किया कि वह प्रस्तावित विधेयक में दो संशोधन का प्रस्ताव पेश करेगी। इस बीच, भाजपा ने अपने सभी संसद सदस्यों को 9 से 11 दिसंबर के सत्र में शामिल होने के लिए 3-लाइन का व्हिप जारी किया है, ताकि विधेयक को समर्थन दिया जा सके।