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सबरीमाला- केरल सरकार की महिला दीवार में एक लाख ईसाई महिलाएँ होंगी सम्मिलित

केरल सरकार द्वारा प्रायोजित “महिला दीवार” के विपक्ष तथा प्रमुख राजनेताओं द्वारा विरोध किए जाने के बाद जैकोबाइट सीरियाई चर्च ने उसका समर्थन किया है, द नयू इंडियन एक्सप्रेस  की रिपोर्ट में बताया गया।

देश भर के राजनीतिक विशेषज्ञ इसे एक ऐसी विचारधारा से प्रभावित कदम मान रहे हैं जो समाज का ध्रुवीकरण कर देगी। वहीं ईसाई समुदाय द्वारा इसका खुलकर समर्थन किया जाना इस संदेह को और गहरा कर देता है।

इस कार्यक्रम को समर्थन देने का चर्च के निर्णय में छिपी हुई राजनीतिक अभिलाषा दिखती है। यह कदम तब उठाया गया है जब पिछले चुनावों में एलडीएफ को समर्थन देने वाले मलंकारा ऑर्थोडॉक्स गुट ने पिरावोम चर्च की अनिष्पत्ति के बाद दरार के संकेत दिए हैं।

ऑर्थोडॉक्स चर्च को झटका देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने जैकोबाइट सीरियन चर्च के अधीन आने वाले इस चर्च को यथास्थिति में होने का आदेश दिया था। रिपोर्ट के अनुसार महिला दीवार के लिए जैकोबाइट का समर्थन पिरावोम चर्च मुद्दे पर कम्युनिस्ट सरकार के सकारात्मक हस्तक्षेप के बदले में लिए गया है न कि लिंग भेदभाव हटाने के लिए।

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ऊपर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लागू करने में उनके द्वारा की जा रही चयनात्मक जल्दबाज़ी के आरोप लगे हैं। उनकी सरकार ने सबरीमाला में जवान महिलाओं के प्रवेश को सुनिश्चित करने के प्रयास किए वहीं पुलिस ने पिरeवोम चर्च मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लागू करने से मना कर दिया।

चर्च के पूर्व प्रवक्ता पादरी वर्गीस कालप्परा ने कहा, “हमें उम्मीद है कि करीब एक लाख जैकोबाइट महिलाएँ महिला दीवार कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी।”

वहीं मलंकारा ऑर्थोडॉक्स चर्च ने अपनी शिकायत मुख्यमंत्री को बताई है तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लागू करने के लिए केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की अपील की है।