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“चाचा पशुपति पारस एक बार कहते तो मैं खुद ही उन्हें यह पद दे देता”- चिराग पासवान

लोक जनशक्ति पार्टी में मची अंतर्कलह के बीच चिराग पासवान ने बुधवार (16 जून) को दिल्ली में कहा, “अब लड़ाई लंबी होगी। अगर चाचा पशुपति पारस मुझसे कहते तो मैं उन्हें स्वतः यह पद दे देता। अब मेरे पास लड़ाई के अलावा विकल्प नहीं है। भविष्य में कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है। मैं लड़ूँगा क्योंकि मेरे पिता ने पार्टी बड़ी मेहनत से बनाई थी।”

न्यूज़-18 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रेसवार्ता में चिराग पासवान ने कहा, “कुछ समय से मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। यह घटनाक्रम मेरे लिए कठिन था। 8 अक्टूबर 2020 को पिता का निधन हुआ। उसके बाद तुरंत चुनाव में उतरने का निर्णय हुआ। मेरे लिए वह कठिन समय था। चुनाव में सोचने का समय नहीं मिल पाया था।”

उन्होंने कहा, “कुछ लोग संघर्ष के रास्ते पर चलने को तैयार थे। उसमें मेरे चाचा ने चुनाव-प्रचार में कोई भूमिका नहीं निभाई। वीणा जी का बेटा खुद दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ रहा था। चुनाव जब खत्म हुआ तो कोरोना आ गया। इसी बीच मेरा स्वास्थ्य बिगड़ गया और मेरी पीठ पीछे षड्यंत्र रचा जाने लगा, जिसका मुझे दुख है।”

चिराग पासवान ने आगे कहा, “मैंने चाचा से संपर्क करने की कोशिश की। होली के दिन उनको पत्र लिखा। उसमें लिखा कि कुछ भी है तो बात कीजिए। मैं उनके घर गया, वहाँ भी कोशिश की। पिता की मौत के बाद कई मौके आए जब चाचा ने परिवार और पार्टी को तोड़ने की कोशिश की।”

भाजपा के प्रश्न पर उन्होंने कहा, “कुछ मुद्दों पर हम एनडीए गठबंधन के साथ बिहार मे आगे नहीं बढ़ सके। पापा थे, तब एलजेपी को तोड़ने का प्रयास हुआ था। अगर मैं जदयू, भाजपा के साथ चुनाव लड़ता तो मुझे सिद्धांतों से समझौता करना पड़ता और नीतीश कुमार के समाने झुकना पड़ता। मैं न झुका और न मैंने समझौता किया।”