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उइगर मुस्लिमों के मुद्दे पर सऊदी के समर्थन के बाद चीन क़ुरान, बाइबल फिर से लिखेगा

चीन पहले से ही पश्चिमी सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों द्वारा झिंजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों की सामूहिक बंदी के तहत जाँच के दायरे में है और अब उसने बाइबल और क़ुरान को फिर से लिखने की योजना बनाई है।

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार चीन ने सभी पुरानी धार्मिक पुस्तकों का अनुवाद करने की योजना बनाई है और नए संस्करणों में समाजवाद का विरोध करने वाली कोई सामग्री नहीं होगी। इसके साथ सेंसर द्वारा गलत समझे जाने वाले पैराग्राफों का संशोधन या फिर से अनुवाद किया जाएगा।

कम्युनिस्ट पार्टी के अनुसार, धार्मिक पुस्तक का पुनर्मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में उन्होंने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति से 16 विशेषज्ञों, विश्वास करने वालों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों का एक समूह नियुक्त किया है।

वर्तमान में यह अनुमान है कि 10 लाख से अधिक उइगर मुस्लिमों को सघनता शिविरों में रखा जा रहा है जिन्हें चीनी पुनः शिक्षा शिविर कहते हैं। एक रिपोर्ट थी कि उइगर मुस्लिम महिलाएँ जिनके पति चीनी बंदी/एकाग्रता शिविरों में हैं, उन्हें चीनी अधिकारियों के साथ सोने के लिए मजबूर किया जा रहा है जो उनकी निगरानी के लिए उनके साथ मौजूद हैं।

विडंबना यह है कि केवल पश्चिम ही चीन की आलोचना करता है, जब वह बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात करता है लेकिन सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे इस्लामी देश चीन और उइगर मुस्लिमों के इलाज पर सर्वव्यापी मौन प्रस्तुत करते हैं।

ओआईसी द्वारा पारित अबू धाबी घोषणापत्र में, इस्लामिक संगठन ने कहा, “हम, उइगर मुस्लिमों को देखभाल प्रदान करने के लिए चीनी जनवादी गणराज्य के प्रयासों की सराहना करते हैं।”

गौरतलब है कि यूँ तो बाइबल में वर्षों में परिवर्तन हुए हैं पर विभिन्न स्रोतों के अनुसार क़ुरान को किसी भी परिवर्तन या उत्सर्जन के अधीन या किसी भी विषय के अधीन नहीं किया गया है।