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चीन पूर्वी लद्दाख के निकट अपनी स्थाई संरचनाएँ बना रहा है- वायुसेना प्रमुख भदौरिया

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर फिर एक लंबे गतिरोध की अपेक्षा है क्योंकि चीन की सेना उन क्षेत्रों में स्थाई संरचनाएँ स्थापित कर रही है, जहाँ पीपल्स लिबरेशन आर्मी तैनात है। यह बात भारतीय वायुसेना प्रमुख के पुष्टि करने के बाद सामने आई है कि चीन वहाँ अपने हवाई इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार कर रहा है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा, “चीन वहाँ स्थाई ढाँचे का निर्माण कर रहा है, जिनमें सैनिकों के रहने की भी व्यवस्था होगी। इस कदम को देखते हुए भारत भी वहाँ सैनिकों के रहने और स्थाई सुरक्षा के लिए ढाँचे का निर्माण कर रहा है लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा।”

रक्षा विश्लेषक मेजर-जनरल (सेवानिवृत्त) एसबी अस्थाना इसे चीन की बढ़ने वाली अतिक्रमण रणनीति बताते हुए कहते हैं, “चीन इस रणनीति के तहत समग्र डिज़ाइन में एलएसी की अपनी धारणा के साथ बुनियादी विकास और उसके दावे को लागू करने की कोशिश कर रहा है। इसी संदर्भ में गाँवों को बसाने और स्थायी ढाँचे को बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि समय के साथ उसका दावा मजबूत होता जाए।”

उन्होंने इसके जवाबी कदम के रूप में सुझाव दिया, “हमें एलएसी की अपनी धारणा के साथ अपने इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार करना चाहिए, स्थाई संरचनाएँ बनानी चाहिए। साथ ही गाँवों को बसाना चाहिए, ताकि चीन अपनी योजना में सफल न हो पाए।”

भारत ने एलएसी पर सड़क निर्माण को तेज़ कर दिया है और पीएलए के किसी भी कदम को विफल करने के लिए पूर्वी लद्दाख में तैनात 50,000 से अधिक कर्मियों के साथ सैनिकों को भी जुटाया है।